हे भगवन !
घाट पे बैठे देख रहा हूँ, देख के माथा ठोक रहा हूँ l
बीच मजधार बहती जाये l
देश की लुटिया है, और उसमे छेद नज़र आये l
किसने नोट खाये, किसने वोट खाये l
किसने वोट के लिए नोट खाये l
जेब झाडूं तो सर चकराये l
वोट और नोट दोनों अपने, जब ये समझ में आये l
हो गया चोरी सब, सालों बाद कुछ याद नहीं अब l
अब तो चौकीदार भी हाथ उठाये, बोले चोरी हुई ही थी कब l
हो गया ये अच्छा तमाशा, एक डब्बा (टीवी) खूब दिखाये l
दिखा दिखा के हमारा तमाशा हम ही को, और पैसे कमाये l
अब तो तुम ही जानो प्रभु, हो सके तो मेरा मानो प्रभु l
एक आधा महाभारत फिर से हो जाये ?
देश की लुटिया है, और उसमे छेद नज़र आये l
कैसे कर के बस पार लग जाये l
घाट पे बैठे देख रहा हूँ, देख के माथा ठोक रहा हूँ l
बीच मजधार बहती जाये l
देश की लुटिया है, और उसमे छेद नज़र आये l
किसने नोट खाये, किसने वोट खाये l
किसने वोट के लिए नोट खाये l
जेब झाडूं तो सर चकराये l
वोट और नोट दोनों अपने, जब ये समझ में आये l
हो गया चोरी सब, सालों बाद कुछ याद नहीं अब l
अब तो चौकीदार भी हाथ उठाये, बोले चोरी हुई ही थी कब l
हो गया ये अच्छा तमाशा, एक डब्बा (टीवी) खूब दिखाये l
दिखा दिखा के हमारा तमाशा हम ही को, और पैसे कमाये l
अब तो तुम ही जानो प्रभु, हो सके तो मेरा मानो प्रभु l
एक आधा महाभारत फिर से हो जाये ?
देश की लुटिया है, और उसमे छेद नज़र आये l
कैसे कर के बस पार लग जाये l
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