ज़मीन बँटी, नदियाँ बँटीं,
बँट गये खेत पहाड़ ।
तेरा ही तो हक़ है बन्दे,
बाँट ले ये संसार ।
खींच लकीर, आसमान में,
रख हवा को, अपनी कमान में,
गौर रहे जो उनके परिन्दे,
जाएँ ना पर मार ।
इन सब पे बस तेरा हक़ है,
बाँट ले ये संसार।
ध्यान रहे !
खुशियां न बाँटना,
ग़म न बाँटना,
कमज़ोर के लिए, दम न बाँटना,
रखना इनकी भरमार,
बँट - बँट के तो ख़त्म हो चुके,
सारे दिल के तार ।
बाँट ले ग़र कुछ और रह गया,
बाँट ले ये संसार ।