Tuesday, September 27, 2016

बंटवारा


ज़मीन बँटी, नदियाँ  बँटीं,
बँट गये खेत पहाड़ । 
तेरा ही तो हक़ है बन्दे,
बाँट ले ये संसार । 

खींच लकीर, आसमान में,
रख हवा को, अपनी कमान में,
गौर रहे जो उनके परिन्दे,
जाएँ ना पर मार । 
इन सब पे बस तेरा हक़ है, 
बाँट ले ये संसार।

ध्यान रहे ! 
खुशियां न बाँटना, 
ग़म न बाँटना, 
कमज़ोर के लिए, दम न बाँटना,
रखना इनकी भरमार,
बँट - बँट के तो ख़त्म हो चुके, 
सारे दिल के तार । 
बाँट ले ग़र कुछ और रह गया,
बाँट ले ये संसार ।