ज़िन्दगी आसान रास्ते ढूंढती है ।
कई डगर चले हम ।
कई शहर चले हम ।
देखा तमाशा बायस्कोप जैसा ।
तेज़ रफ़्तार थी ।
चकाचौंध रोशनियों से सराबोर ,
हर ओर का समां था ।
चाह ऐसी थी के आसमां ही पा लेंगे ।
चलते रहे बस उस तरफ ,
जिधर की दिशा से आँखें सम्मोहित थीं ।
कांटे भी लगे , चोटें भी।
पर तब कुछ न होश था ।
थी तो सिर्फ एक होड़ और
धड़कनों में जोश था ।
दिन वो था जब ठोकर लगी , आँखें खुलीं ,
जैसे नींद से जागे हम और देखा ,
आसमां अब भी बित्ते भर दूर था ।
खूब रोये गाये थे हम ।
दिल को भी समझाए थे हम ।
के बस बोहोत हुआ ,
चलो वापस इस वीराने से ।
कुछ चले हम थके प्यासे से ।
कहीं एक पेड़ दिखा तो वहीँ रुक लिए ।
पेशानी से हटाया पसीना और
की आँखें बंद तो ये एहसास हुआ के
लौटना कितना दूभर है , और
ज़िन्दगी अब भी आसान रास्ते ढूंढ़ती है ।
कई डगर चले हम ।
कई शहर चले हम ।
देखा तमाशा बायस्कोप जैसा ।
तेज़ रफ़्तार थी ।
चकाचौंध रोशनियों से सराबोर ,
हर ओर का समां था ।
चाह ऐसी थी के आसमां ही पा लेंगे ।
चलते रहे बस उस तरफ ,
जिधर की दिशा से आँखें सम्मोहित थीं ।
कांटे भी लगे , चोटें भी।
पर तब कुछ न होश था ।
थी तो सिर्फ एक होड़ और
धड़कनों में जोश था ।
दिन वो था जब ठोकर लगी , आँखें खुलीं ,
जैसे नींद से जागे हम और देखा ,
आसमां अब भी बित्ते भर दूर था ।
खूब रोये गाये थे हम ।
दिल को भी समझाए थे हम ।
के बस बोहोत हुआ ,
चलो वापस इस वीराने से ।
कुछ चले हम थके प्यासे से ।
कहीं एक पेड़ दिखा तो वहीँ रुक लिए ।
पेशानी से हटाया पसीना और
की आँखें बंद तो ये एहसास हुआ के
लौटना कितना दूभर है , और
ज़िन्दगी अब भी आसान रास्ते ढूंढ़ती है ।
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