बेज़ार दिल किधर चला पता नहीं ।
बेकरार मन किधर चला पता नहीं ।
एक आवाज़ देकर बुला लो किसी बज़्म में ।
एक आग़ाज़ ही दे डालो मेरी अज़्म में ।
वार्ना मैं ठेहरा एक कठपुतलि ।
उसकी डोर का अंजाम ही डालो मेरे इल्म में ।
बेकरार मन किधर चला पता नहीं ।
एक आवाज़ देकर बुला लो किसी बज़्म में ।
एक आग़ाज़ ही दे डालो मेरी अज़्म में ।
वार्ना मैं ठेहरा एक कठपुतलि ।
उसकी डोर का अंजाम ही डालो मेरे इल्म में ।
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