मरता क्या ना करता ।
चला में पैदल जहाँ थी भीड़, नंगे पाँव
पहनने को ना थी एक चप्पल ।
गिरा एक पानी भरे खड्डे में
ना थी ढंग की सड़क ।
उठा चला और लगा कतार में पसीने से तर ।
ना थी सर पर छाँव ।
रंगा कर अपनी उंगली काली सोचा मैं खड़ा ।
मतपत्र देख मेरा मत, "मत, मत कर" कहने लगा ।
एक कुआँ तो एक खाई ।
आँखें बंद कर प्रभु का नाम ले दबा दी एक बटन ।
मरता क्या ना करता ।
चुन लिया एक कुआँ वो भी सूखा
ना पानी है ना खाना ।
सिलसिला ये ही चला हर पाँच वर्ष
हर मतदान बस अगले की उमीद दे पता है
और कुछ नई करता
मैं बेचारा मरता क्या ना करता?
चला में पैदल जहाँ थी भीड़, नंगे पाँव
पहनने को ना थी एक चप्पल ।
गिरा एक पानी भरे खड्डे में
ना थी ढंग की सड़क ।
उठा चला और लगा कतार में पसीने से तर ।
ना थी सर पर छाँव ।
रंगा कर अपनी उंगली काली सोचा मैं खड़ा ।
मतपत्र देख मेरा मत, "मत, मत कर" कहने लगा ।
एक कुआँ तो एक खाई ।
आँखें बंद कर प्रभु का नाम ले दबा दी एक बटन ।
मरता क्या ना करता ।
चुन लिया एक कुआँ वो भी सूखा
ना पानी है ना खाना ।
सिलसिला ये ही चला हर पाँच वर्ष
हर मतदान बस अगले की उमीद दे पता है
और कुछ नई करता
मैं बेचारा मरता क्या ना करता?
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