Tuesday, February 16, 2016

हँसने की दुविधा

हँसना बुरी बात नहीं है । 
दिल से निकल कर चेहरे पे फूटती है, फ़व्वारे की तरह । 
और बखेर देती है खुशी चहुँ ओर । 

हँसना बुरी बात है । 
अगर सामने वाले की बुरी हालत देख निकल गयी हो । 
कोई वजूद नहीं ऐसी हँसी का । 

चलो आज अच्छी हँसी की बात करते हैं । 
जो तुम्हारे चेहरे पे होती है । 
जब तुम हँसते हो, तो मेरे दिल में बसते हो । 
इसी लिए जब तुम रोते हो तो मैं तुम्हारा सर 
अपने दिल से लगा लेता हूँ । 
इस उम्मीद में कि कुछ वोही मेरे दिल में बसी तुम्हारी हँसी 
फिर तुम्हारे चेहरे पे वापस आ जाये । 

मुझे तुमको हँसाना नहीं आता है 
अनाड़ी हूँ मैं । 
कभी मैं ना भी रहूँ पास ।
बस एक बार याद कर लो मेरा चेहरा 
और हँस दो, हँस दो, हँस दो । 
तो मुझे पता चल जायेगा । 
कैसे ?
क्यूंकि मेरे दिल को वो हंसी वापस मिल जाएगी 
और दिल अपने आप अच्छा हो जायेगा ।

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