Monday, February 29, 2016

कसक

मुस्कुराते अरमान जागते सोते हैं ।
कुछ अधूरे अनकहे से होते हैं ।
पसरे आसमान को एक टुक ताके पपीहा ।
पर बादल भी हर बार कहाँ रोते हैं ।

झाँक झरोखे की तारीफ़ कैसे करूँ ।
आप कभी कभार ही वहां होते हैं ।
ज़िद कर रहा हूँ आपसे ।
चलें मेरे साथ राह दर राह ।
मत पूछें 'कहाँ जाना है' हमसे ।
क्यूंकि कुछ राह के ही ठिकाने होते हैं ।

जलता हूँ उस हवा से ।
चिढ़ाती है जो हमें जान बूझ कर ।
कहे सांस बन आपके दिल तक है पहुँचती ।
जवाब देने की कसक पे मरहम लगा दें एक बार ।
बोल दें हमें एक बार ।
के हम आपके दिल में हमेशा होते हैं ।

No comments:

Post a Comment