आधे अधूरे से सच थे, पर झूठे न थे ।
तुम कुछ नाराज़ थे, पर रूठे न थे ।
एक अनजान झोंके ने, प्यार की डाल को ऐसा झूला दिया ।
लाख रोका, पर मुझको रुला दिया ।
आंधियाँ देखी थी कई उन्होंने,
पर चाहत के दरख़्त कभी टूटे न थे ।
तुम नाराज़ थे, पर रूठे न थे ।
इतने दर्द को देख आते जाते हर झोंके ने पूछा, "है सलामत ?"
जब कहते न बना तो जाने दिया उनको ।
कभी मेरे दिल के घाव इतने अनूठे न थे ।
नया क्या है इस टीस में क्यों पूछते हो ।
बेशक दिल दुखा, बेशक रोये ।
लोगों को पत्थर में भगवान मिलता है,
तो सोचते हैं किस्मत वाले हैं ।
मुझ अभागे को देख लो,
मैंने भगवान को वापस पत्थर बना दिया ।
मुड़ कर इतनी जल्दी तुम चल दिए,
अभी आँखों के आंसू ठीक से फूटे न थे ।
तुम कुछ नाराज़ थे, पर रूठे न थे ।
तुम कुछ नाराज़ थे, पर रूठे न थे ।
एक अनजान झोंके ने, प्यार की डाल को ऐसा झूला दिया ।
लाख रोका, पर मुझको रुला दिया ।
आंधियाँ देखी थी कई उन्होंने,
पर चाहत के दरख़्त कभी टूटे न थे ।
तुम नाराज़ थे, पर रूठे न थे ।
इतने दर्द को देख आते जाते हर झोंके ने पूछा, "है सलामत ?"
जब कहते न बना तो जाने दिया उनको ।
कभी मेरे दिल के घाव इतने अनूठे न थे ।
नया क्या है इस टीस में क्यों पूछते हो ।
बेशक दिल दुखा, बेशक रोये ।
लोगों को पत्थर में भगवान मिलता है,
तो सोचते हैं किस्मत वाले हैं ।
मुझ अभागे को देख लो,
मैंने भगवान को वापस पत्थर बना दिया ।
मुड़ कर इतनी जल्दी तुम चल दिए,
अभी आँखों के आंसू ठीक से फूटे न थे ।
तुम कुछ नाराज़ थे, पर रूठे न थे ।
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