"छलक ही न गई हो ज़रा सी जिनसे, वो पैमाने क्या बने ।
ज़रा सी मनमानी न की तुमसे, तो दीवाने क्या बने ।"
किसी बात से रूठे हुए प्रेमी शिक़वा करते हुए ।
"बाअदबी की हद थी, के उनको जाने दे दिया ।
बेअदबी की हद थी, के उन्होंने याद भी ना किया ।"
ज़रा सी मनमानी न की तुमसे, तो दीवाने क्या बने ।"
किसी बात से रूठे हुए प्रेमी शिक़वा करते हुए ।
"बाअदबी की हद थी, के उनको जाने दे दिया ।
बेअदबी की हद थी, के उन्होंने याद भी ना किया ।"
Very nice :)
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